ऋषिकेश में टूरिस्ट बने निशाना,स्कूटी सवार महिला के विवाद में भीड़ का कहर
ऋषिकेश। कोतवाली ऋषिकेश पर वादी श्री सतवीर पुत्र देवा सिंह निवासी ग्राम गुच्जी, थाना पुण्ड्री, जनपद कैथल (हरियाणा) द्वारा एक प्रार्थना पत्र दिया जिसमे बताया गया की दिनाँक 20/05/2026 को अपने वाहन से अपने साथियों के साथ ऋषिकेश घूमने आने के दौरान काले की ढालवाला क्षेत्र के पास एक स्कूटी सवार महिला द्वारा रोकने के उपरांत हुए विवाद के पश्चात मौके पर एकत्रित व्यक्तियों द्वारा उनके व उनके साथियों के साथ गाली-गलौच करते हुए मारपीट कर जानलेवा हमला करने।
जिसमे उन्हें व उनके साथियों को गंभीर चोटें आने तथा उनकी कार हुंडई वेन्यू नंबर HR08AL9393 को क्षतिग्रस्त करने के संबंध में दिया गया।
प्राप्त तहरीर के आधार पर कोतवाली ऋषिकेश पर मु0अ0सं0-209/2026 धारा 109(1)/191(2)/117(2)/351(3)/352/324(4) BNS बनाम अशोक थापा, नरेश, आयुष, अमित एवं अन्य अज्ञात व्यक्तियों (सभी निवासी क्षेत्र ऋषिकेश/आसपास, जनपद देहरादून) पंजीकृत किया गया है।
प्रकरण में पुलिस द्वारा साक्ष्य संकलन करते हुए घटना में शामिल अभियुक्तों की पहचान एवं गिरफ्तारी हेतु आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।
कानून हाथ में लेना गलत
मान भी लिया जाए कि युवकों से कोई गलती हुई थी, तब भी आम जनता को कानून अपने हाथ में लेने का कोई अधिकार नहीं है। मारपीट करना, दुर्व्यवहार करना और संपत्ति को नुकसान पहुंचाना सीधे तौर पर अपराध है। शासन, प्रशासन और पुलिस का काम है कि दोषी को सजा दिलाए।
अगर युवकों ने कोई नियम तोड़ा था तो सही तरीका यही था कि पुलिस को सूचना दी जाती। पुलिस जांच करती और कानून के मुताबिक कार्रवाई होती। भीड़ द्वारा पीटना और गाड़ी तोड़ना न्याय नहीं, गुंडागर्दी है।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
इस घटना ने ऋषिकेश जैसे पर्यटन शहर की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बाहर से आने वाले पर्यटक अगर इस तरह भीड़ के न्याय का शिकार होंगे तो लोग यहां आने से कतराएंगे। पीड़ित युवकों ने पुलिस से निष्पक्ष जांच और हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल कोतवाली ऋषिकेश ने प्रार्थना पत्र के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
कानून सबके लिए बराबर है। गलती पर सजा कोर्ट देगा, सड़क पर खड़ी भीड़ नहीं।